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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 147
बाल्ये पितुर्वशे तिष्ठेत्‌ पाणिग्राहस्य यौवने । पुत्राणां भर्तरि प्रेते न भजेत्सतरी स्वतन्त्रताम्‌ ।।
स्त्री बचपन में पिता के, जवानी में पति के और पति के मर जाने पर बुढ़ापे में पुत्र के वश में रहे (उनकी आज्ञा तथा सम्मति के अनुसार कार्य करे) स्वतंत्र कभी न रहे।
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