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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 145
एष शौचविधिः कृत्स्नो द्रव्यशुद्धस्तथैव च । उक्तो वः सर्ववर्णानां सत्रीणां धर्मान्निबोधत ।।
भृगुजी महर्षियों से कहते है कि - सब वर्णो का जन्म-मरण-सम्बन्धी अशौच शुद्धि को तथा द्रव्यशुद्धि को (५।५७-१६५) आप लोगों से मैंने कहा, अब (आप लोग) स्त्रियों के धर्मो को सुनें।
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