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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 143
वान्तो विरिक्तः स्नात्वा तु घृतप्राशनमाचरेत्‌ । आचामेदेव भुक्त्वाऽन्नं स्नानं मैथुनिनः स्मृतम्‌ ।।
वमन एवं शौच करने पर स्नान कर घी खाने से तथा भोजन करते ही वमन करे तो आचमन करने से और ऋतुकाल के बाद शुद्ध स्त्री के साथ सम्भोग करके स्नान करने से शुद्धि होती है।
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