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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 142
उच्छिष्टेन तु संस्पृष्टो द्रव्यहस्तः कथञ्चन । अनिधायैव तद्‌द्रव्यमाचान्तः शुचितामियात्‌ ।।
भोजन-सामग्री (पका हुआ अन्न कच्चा अन्न या फल आदि नहीं) को लिया हुआ व्यक्ति यदि किसी जूठे मुंह बाले व्यक्ति का स्पर्श कर ले तो वह भोजनः सामग्री को बिना रखे ही आचमन करने से शुद्ध हो जाता है।
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