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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 140
नोच्छिष्टं कुर्वते मुख्या विप्रुषोऽङ्गं न यन्ति या: । न श्मश्रूणि गतान्यास्यं न दन्तान्तरधिष्ठितम्‌ ।।
मुख से निकलकर शरीर पर पड़ने वाली छोटी-बूँदें, मुख में पड़ते हुए मूँछ के बाल और दाँतों के बीच में अटका हुआ अन्नादि मनुष्य को जूठा नहीं करते हैं।
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