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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 139
शूद्राणां मासिकं कार्य वपनं न्यायवर्तिनाम्‌ । वैश्यवच्छौचकल्पश्च द्विजोच्छिष्टं च भोजनम्‌ ।।
यथाशासत्र आचरण (द्विज-सेवा) करने वाले शूद्रों को एक मास पर मुण्डन कराना चाहिये, वैश्य के समान (मृतक सूतक आदि में) शुद्धि विधान करना चाहिये और ब्राह्मण के उच्छिष्ट का भोजन करना चाहिये।
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