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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 138
त्रिराचामेदपः पूर्व द्विः प्रमृज्यात्ततो मुखम्‌ । शारीरं शौचमिच्छन्हि स्त्री शूद्रस्तु सकृत्सकृत्‌ ।।
शारीरिक शुद्धि को चाहता हुआ मनुष्य तीन बार जल से आचमन करे, दो बार मुख पोछे और स्त्री तथा शूद्र एक-एक बार आचमन करे।
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