यह (पूर्व श्लोकोक्त संख्यानुसार) शुद्धि गृहस्थों के लिये है, ब्रह्मचारियों के लिये उससे द्विगुणित बार, वानग्रस्थों के लिये त्रिगुणित बार, सन्यासियों के लिये चतुर्गुणित बार मिट्टी लगाने आदि की क्रिया करनी चाहिये।
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