एका लिङ्गे गुदे तिस्रस्तथैकत्र करे दश ।
उभयोः सप्त दातव्या मृदः शुद्धिमभीप्सता ।।
शुद्धि चाहने वाले को लिङ्ग में एक, गुदा में तीन, हाथ (बांये हाथ) में दस और दोनों हाथों में सात बार मिट्टी लगानी चाहिये।
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