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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 131
ऊर्ध्वं नाभेर्यानि खानि तानि मेध्यानि सर्वशः । यान्यधस्तान्यमेध्यानि देहाच्चैव मलाश्च्युताः ।।
नाभि से ऊपर जितने छिद्र (कान, आँख, नाक आदि) इन्द्रियाँ हें, वे स्पर्श में शुद्ध हैं और (नाभि) के नीचे वाले छिद्र (गुदा, आदि) तथा शरीर से निकली मैल (मल, मूत्र, कफ, थूक, खोंट आदि) सभी अशुद्ध हैं।
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