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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 130
श्वभिर्हतस्य यन्मांसं शुचि तन्मनुरब्रवीत्‌ । क्रव्याद्भिश्च हतस्यान्यैश्चण्डालाद्यैश्च दस्युभिः ।।
(शिकार में) कुत्तों से मारे गये (मृग आदि पशुओं तथा पक्षियों) के मांस को मनु ने शुद्ध कहा है । तथा कच्चे मांस को खाने वाले (व्याघ्र, भेड़िया आदि पशु तथा गीध-बाज आदि पक्षियों) तथा व्याध आदि के द्वारा मारे हुए (पशुं-पक्षियों) का मांस शुद्ध होता है।
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