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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 13
प्रतुदान्‌ जालपादांश्च कोयष्टिनखविष्किरान्‌ । निमज्जतश्च मत्स्यादान्‌ सौनं वल्लूरमेव च ।।
प्रतुद (चोंच से काटकर खाने वाले पक्षी, जैसे - कठफोरवा, आदि), बत्तख कोयष्टि (कोहड़ा नामक पक्षि-विशेष), नाखून (चंगुल से बिखेरकर खाने वाले पक्षी) (तीतर आदि), पानी में गोता लगाकर मछलियों को खाने वाले पक्षी, इन पक्षियों के मांस को तथा मारने के स्थान (वधस्थान) में रखे हुए (भक्ष्य भी) मांस को और सूखे मांस को (न खावे)।
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