मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 128
नित्यं शुद्धः कारुहस्तः पण्यं यच्च प्रसारितम्‌ । ब्रह्मचारिगतं भैक्ष्य नित्यं मेध्यमिति स्थितिः ।।
कारीगर का हाथ, बाजार में (बेचने के लिये) फैलायी (या रखी गयी) वस्तु और ब्रह्मचारी को प्राप्त भिक्षाद्रव्य सर्वदा शुद्ध है; ऐसी शास्त्र-मर्यादा है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें