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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 124
पक्षिजग्धं गवा घ्रातमवधूतमवक्षुतम्‌ । दूषितं केशकीटैश्च मृत्प्रक्षेपेण शुद्धयति ।।
कौआ, गीध आदि अभक्ष्य पक्षियों को छोड़कर अन्य भक्ष्य) पक्षियों के खाये हुए, गौ से सूँधे हुए, पैर से छूए हुए, जिसके ऊपर छींक दिया गया हो उसकी एवं बाल तथा कीड़े आदि से दूषित (थोड़े अन्न आदि भक्ष्य पदार्थ) की शुद्धि (थोड़ी) मिट्टी डालने से होती है।
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