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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 120
क्षौमवच्छङ्क शृङ्गाणामस्थिदन्तमयस्य च । शुद्धिर्विजानता कार्या गोमूत्रेणोदकेन वा ।।
शंख, (स्पृश्य पशुओं के) सींग, हड्डी और दाँत से बने पदार्थो (यथा-कंघी, कलम, बटन, चाकू के बेंट एवं दूसरे खिलौने आदि उक्त शङ्क, सींग; हाथी आदि की हड्डियों एवं हाथी-दाँतों से बने पदार्थो) की शुद्धि क्षौम वस्रों के समान (पीसे हुए सफेद सरसों के कल्क द्वारा धोने से), गोमूत्र से या जल से शुद्धि - विषय को जानने वालों को करनी चाहिए।
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