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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 117
अद्भिस्तु प्रोक्षणं शौचं बहूनां धान्यवाससाम्‌ । प्राक्षालनेन त्वल्पानामद्भिः शौचं विधीयते ।।
और बहुत से धान्य तथा वस्रो की शुद्धि पानी छिड़कने से होती है तथा थोड़ी मात्रा में होने पर अन्न तथा वस्त्र की शुद्धि उन्हें धोने पर होती है।
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