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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 112
अपामग्नेश्च संयोगाद्धैमं रौप्यं च निर्बभौ । तस्मात्तयोः स्वयोन्यैव निर्णेको गुणवत्तरः ।।
पानी तथा अग्नि के संयोग से सुवर्ण तथा चाँदी उत्पन्न हुए हैं। अतएव इन (सुवर्ण तथा चाँदी) की शुद्धि भी अपनी योनि (उत्पत्ति-स्थान अर्थात्‌ जल और अग्नि) से ही उत्तम होती है।
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