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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 110
तैजसानां मणीनां च सर्वस्याश्ममयस्य च । भस्मनाऽद्धिर्मृदा चैव शुद्धिरुक्ता मनीषिभिः ।।
तेजस पदार्थ (सोना आदि), मणि (मरकत-पन्ना आदि रत्न), और पत्थर के बने सर्वविध पदार्थ (वर्तन आदि) की शुद्धि भस्म, मिट्टी और जल से होती है, ऐसा मनु आदि विद्वानों ने कहा है।
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