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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 104
ज्ञानं तपोऽग्निराहारो मृन्मनो वार्युपाञ्जनम्‌ । वायुः कर्मार्ककालौ च शुद्धेः कर्तृणि देहिनाम्‌ ।।
ज्ञान, तप, अग्नि, आहार, मिट्टी, मन, जल, अनुलेपन, वायु, कर्म (यज्ञादि कृत्य), सूर्य और समय, ये देहधारियों की शुद्धि करने वाले हैं।
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