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मनुस्मृति • अध्याय 5 • श्लोक 103
न विप्र स्वेषु तिष्ठत्सु मृतं शूद्रेण नाययेत्‌ । अस्वर्ग्या ह्याहुतिः सा स्याच्छुद्रसंस्पर्शदूषिता ।।
स्वबान्धवों के उपस्थित रहने पर मृत ब्राह्मण को शूद्र के द्वारा बाहर न निकलवावे; क्योंकि वह निर्हरण (शूद्र के द्वारा विप्र के शव का बाहर निकलवाना) स्वर्ग प्राप्ति में बाधक होता है।
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