पूर्व (५।१०१) श्लोकोक्त मृत असपिण्ड द्विज के शव को स्नेह से बाहर निकालकर यदि ब्राह्मण उसका अन्न भोजन करे तो दस दिन में शुद्ध होता है और यदि उस मृत असपिण्ड द्विज के अन्न को नहीं खाता हो और उसके घर में भी नहीं रहता हो तब (उसके शव को बाहर निकालने पर) एक दिन (दिन-रात) में वह ब्राह्मण शुद्ध हो जाता है। (और उसके घर रहने पर तथा उसका अन्न नहीं खाने पर तीन रात में शुद्ध होता है)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।