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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 90
लोहशङ्कुं ऋजीषं च पन्थानं शाल्मलीं नदीम् । असिपत्रवनं चैव लोहदारकमेव च ॥
(15) लोहशंकु, (16) जिष, (17) पथिन, (18) शाल्मली, (19) नदी, (20) असिपत्रवन और (21) लोहदारक।
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