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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 89
सञ्जीवनं महावीचिं तपनं सम्प्रतापनम् । संहातं च सकाकोलं कुड्मलं प्रतिमूर्तिकम् ॥
(7) संजीवन, (8) महावीचि, (9) तपन, (10) सम्पतपन, (11) सहत, (12) सकाकोल, (13) कुम्मल, (14) पुतिमृत्तिक,
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