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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 88
तामिस्रमन्धतामिस्रं महारौरवरौरवौ । नरकं कालसूत्रं च महानरकमेव च ॥
(1) तामिस्र, (2) अंधतामिस्र, (3) महारौरव, (4) रौरव, (5) कालसूत्र-नरक, (6) महानारक,
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