न संहताभ्यां पाणिभ्यां कण्डूयेदात्मनः शिरः ।
न स्पृशेच्चैतदुच्छिष्टो न च स्नायाद् विना ततः ॥
वह दोनों हाथ जोड़कर अपना सिर न खुजलाए; अशुद्ध अवस्था में वह उसे न छुए; और वह इसके बिना न नहाएगा।
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