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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 78
अधितिष्ठेन्न केशांस्तु न भस्मास्थिकपालिकाः । न कार्पासास्थि न तुषान् दीर्घमायुर्जिजीविषुः ॥
जो व्यक्ति दीर्घ जीवन जीने की इच्छा रखता है, वह न तो बालों पर पैर रखेगा, न ही राख, हड्डियों और बर्तनों पर; या कपास के बीज या भूसी पर।
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