न मृत्लोष्ठं च मृद्नीयान्न छिन्द्यात् करजैस्तृणम् ।
न कर्म निष्फलं कुर्यान्नायत्यामसुखोदयम् ॥
वह मिट्टी के ढेले न चूर करेगा; न ही वह अपने नाखूनों से घास काटेगा। वह कोई लक्ष्यहीन कार्य नहीं करेगा, न ही ऐसा कोई कार्य करेगा जिसके अप्रिय परिणाम होने की संभावना हो।
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