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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 67
नाविनीतैर्भजेद् धुर्यैर्न च क्षुध्व्याधिपीडितैः । न भिन्नशृङ्गाक्षिखुरैर्न वालधिविरूपितैः ॥
वह अप्रशिक्षित बोझ ढोनेवाले पशुओं के साथ यात्रा न करे; न ही ऐसे पशुओं के साथ जो भूख या बीमारी से पीड़ित हैं; न ही उन पशुओं के साथ जिनके सींग, आंखें या खुर घायल हो गए हों; न ही उन पशुओं के साथ जो अपनी पूँछ से विकृत हो गए हैं।
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