न भुञ्जीतोद्धृतस्नेहं नातिसौहित्यमाचरेत् ।
नातिप्रगे नातिसायं न सायं प्रातराशितः ॥
वह कोई ऐसी वस्तु न खाएगा जिसमें से तेल निकाला गया हो; वह लोलुपता नहीं करेगा; वह न तो बहुत सबेरे को जल्दी खाएगा, और न बहुत शाम को; न ही शाम को, अगर उसने सुबह खाया हो।
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