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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 53
नाग्निं मुखेनोपधमेन्नग्नां नैक्षेत च स्त्रियम् । नामेध्यं प्रक्षिपेदग्नौ न च पादौ प्रतापयेत् ॥
वह मुँह से आग न फूंके; और न वह किसी नग्न स्त्री की ओर दृष्टि करेगा। वह किसी अशुद्ध वस्तु को आग में न फेंके; न ही वह उस पर अपने पैर गरम करेगा।
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