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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 51
मूत्रोच्चारसमुत्सर्गं दिवा कुर्यादुदङ्मुखः । दक्षिणाऽभिमुखो रात्रौ सन्ध्यायोश्च यथा दिवा ॥
वह दिन के समय उत्तर दिशा की ओर मुख करके मल-मूत्र त्याग करे; और रात को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके; और दिन के समान गोधूलि के दोनों पहर।
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