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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 47
न ससत्त्वेषु गर्तेषु न गच्छन्नपि न स्थितः । न नदीतीरमासाद्य न च पर्वतमस्तके ॥
न जीवित प्राणियों वाले बिलों में, न चलते हुए, न खड़े होते हुए, न नदी के तट पर, न पहाड़ की चोटी पर।
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