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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 45
नान्नमद्यादेकवासा न नग्नः स्नानमाचरेत् । न मूत्रं पथि कुर्वीत न भस्मनि न गोव्रजे ॥
वह केवल एक कपड़ा ओढ़े हुए भोजन न करे; वह नंगा न नहाएगा; वह न मार्ग में, न राख पर, न गाय के आश्रय पर मूत्र त्याग करेगा।
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