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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 37
नेक्षेतोद्यन्तमादित्यं नास्तं यान्तं कदा चन । नोपसृष्टं न वारिस्थं न मध्यं नभसो गतम् ॥
वह सूर्य को न तो उगते समय, न डूबते समय, न ग्रहण के समय, न जल में, न आकाश के मध्य में पहुँचते समय देखे।
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