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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 35
कॢप्तकेशनखश्मश्रुर्दान्तः शुक्लाम्बरः शुचिः । स्वाध्याये चैव युक्तः स्यान्नित्यमात्महितेषु च ॥
अपने बाल, नाखून और दाढ़ी काटकर, वशीभूत, सफेद कपड़े पहनकर, शुद्ध रहकर, वह हमेशा वैदिक अध्ययन में लगा रहेगा, साथ ही वह काम भी करेगा जो उसके कल्याण के लिए अनुकूल हो।
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