नानिष्ट्वा नवसस्येष्ट्या पशुना चाग्निमान् द्विजः ।
नवान्नमद्यात्मांसं वा दीर्घमायुर्जिजीविषुः ॥
नई फसल का यज्ञ और पशु बलिदान किए बिना, अग्नि स्थापित करने वाला ब्राह्मण नया अनाज या मांस नहीं खाएगा, यदि वह लंबा जीवन जीना चाहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।