वचन (शब्द) में सब अर्थ निश्चित है और वचन से ही सबका (प्रतीति द्वारा) ज्ञान होता है । जो मनुष्य उस वचन को चुराता (कपटपूर्वक छिपाकर कहता) है, वह सब कुछ का चोर समझा जाता है।
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