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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 252
नाश्नन्ति पितरस्तस्य दशवर्षाणि पञ्च च । न च हव्यं बहत्यम्निर्यस्तामभ्यवमन्यते ।।
जो उस भिक्षा को अपमानित करता (नहीं लेता) है, उससे दिये गये कव्य (श्रद्धान्न) को पन्द्रह वर्ष तक पितर लोग नहीं लेते और अग्नि हव्य (आहुति में दिया गया हविष्यान्न) को नहीं लेती।
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