नाश्रन्ति पितरस्तस्य दशवर्षाणि पञ्च च । न च हव्यं वहत्यम्निर्यस्तामभ्यवमन्यते ।।
जो उस भिक्षा को अपमानित करता (नहीं लेता) है, उससे दिये गये कव्य (श्राद्धान्न) को पन्द्रह वर्ष तक पितर लोग नहीं लेते और अग्नि हव्य (आहुति में दिया गया हविष्यान्न) को नहीं लेती।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।