दान लेने वाले के पास सामने रक्खी हुई, स्वयं (दान लेने वाले के द्वारा) अथवा अन्य किसी के द्वारा प्रेरणा करके नहीं मँगायी गयी और “आप (दान लेने वाले) को अमुक वस्तु, अमुक प्रमाण या अमुक समय में दूँगा' इस प्रकार दाता के द्वारा पहले नहीं कही हुई भिक्षा वस्तु (हिरण्य आदि) पापियों (पतित रहित) से भी लेनी चाहिये; ऐसा ब्रह्मा मानते हैं।
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