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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 247
एधोदकं मूलफलमन्नमभ्युद्यतं च यत्‌। सर्वतः प्रतिगृह्णीयान्मध्वथाभयदक्षिणाम्‌ ।।
लकड़ी, जल, मूल, फल, बिना माँगे आया हुआ अन्न, मधु, (शहद) और अभयदान (अपने रक्षार्थ) सबसे ग्रहण करे।
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