मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 246
दृढकारी मृदुदन्तिः क्रूराचारैरसंवसन्‌ । अहिंस्रो दमदानाभ्यां जयेत्स्वर्ग तथाव्रतः ।।
दृढकर्ता (विघ्नादि के आने पर भी प्रारम्भ किये गये कार्य को पूरा करने वाला) निष्ठुरता से रहित, सुखदुःखादि इन्द्रो को सहने वाला, क्रूर आचरण वालों का साथ नहीं करता हुआ, अहिंसक जैसा व्रत (नियम, यम इन्द्रिय संयम तथा दानादि) करने वाला स्वर्ग को जीत लेता (प्राप्त करता) है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें