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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 243
धर्मप्रधानं पुरुषं तपसा हतकिल्विषम्‌ । परलोकं नयत्याशु भास्वन्तं स्वशरीरिणम्‌ ।।
तपस्या से पापहीन, प्रकाशमान और ब्रह्मस्वरूप धर्मपरायण पुरुष को (धर्म ही) परलोक (ब्रह्मलोक, स्वर्गलोक आदि) को ले जाता है।
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