इस कारण (परलोक में) सहायता के लिए धीरे-धीरे धर्म का सर्वदा सञ्चय करे; क्योंकि धर्म से दुस्तर (कठिनाई से पार करने योग्य) तम (नरकादि के दुःख) को पार करता है।
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