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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 241
मृतं शरीरमुत्सृज्य काष्ठलोष्टसमं क्षितौ । विमुखा बान्धवा यान्ति धर्मस्तमनुगच्छति ।।
बान्धव लोग मरे हुए (निर्जीव) शरीर को लकड़ी और ढेले के समान भूमि पर छोड़ पराङ्‌ मुख होकर चले जाते हैं (उसके साथ नहीं जाते, किन्तु) एक धर्म ही उसके पीछे जाता है।
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