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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 233
सर्वेषामेव दानानां ब्रह्मदानं विशिष्यते । वार्यन्नगोमहीवासस्तिलकाञ्जनसर्पिषाम्‌ ।।
जल, अन्न, गौ, भूमि, वस्र, तिल, सुवर्ण और घृत; इन सबके दान से ब्रह्मदान (वेद का पढ़ाना) श्रेष्ठ फल देने वाला है।
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