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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 229
वारिदस्तृप्तिमाप्नोति सुखमक्षयमन्नदः । तिलप्रदः प्रजामिष्टां दीपदश्चक्षुरुत्तमम्‌ ।।
जलदान करने वाला तृप्ति को, अन्नदान करने वाला अक्षय्य (क्षीण नहीं हो सकने योग्य) सुख को, तिलदान करने वाला अभिलषित सन्तान को और दीपदान करने वाला उत्तम (रोगादिरहित) नेत्र को पाता है।
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