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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 222
भुक्त्वा5 तोऽ न्यतमस्यान्नममत्या क्षपणं त्र्यहम्‌ । मत्या भुक्त्वाऽ ऽचरेत्कृच्छ्‌ रेतोविण्मूत्रमेव च ।।
इन में से किसी एक के अन्न को आज्ञानपूर्वक खाकर तीन दिन उपवास करे तथा ज्ञानपूर्वक शुक्र, मल और मूत्र के समान इन अन्नों को खाकर कृच्छरब्रत करे।
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