वैद्य का अन्न पीव, व्यभिचारिणी का अन्न शुक्र (वीर्य), सूदखोर (सूद से ही जीविका करने वाला) का अन्न विष्ठा तथा शास्त्र बेचने वाले का अन्न मल (कफ, कान का खोंट नाक का पोटा आदि) के समान है।
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