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मनुस्मृति • अध्याय 4 • श्लोक 218
राजान्नं तेज आदत्ते शूद्रान्नं ब्रह्मवर्चसम्‌ । आयुः सुवर्णकारान्नं यशश्चर्मावकर्तिनः ।।
राजा का अन्न (खाने वाले के) तेज को, शूद्र का अन्न ब्रह्मवर्चस (ब्रह्मतेज) को, सोनार का अन्न आयु को और चमार का अन्न यश को ले लेता है (अत: इनके अन्न को नहीं खाना चाहिये)।
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